Tuesday, May 12, 2009

साधक के लिये कुछ उपयोगी बातें

आप सबका स्वागत है इस नये चिट्ठे पर। इसका उद्देश्य है बिना किसी लाग-लपेट के, दर्शन के उहापोह से परे, विविध कर्मकांडों से अलग आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग की चर्चा। जो भी इस पथ के पथिक हैं वे साधक हैं। साधक का ये कतई मतलब नहीं है कि वो इस संसार से दूर हिमालय की कंदराओं में निवास करे। इस बारे में आगे विस्तार से चर्चा की जायेगी। फ़िलहाल कुछ आवश्यक बातें जो खयाल में रखने लायक हैं -

.साधना के लिये उम्र की कोई सीमा नहीं है। कहा जाता है-तेजसां हि वयः न समीक्ष्यंते-अर्थात तेजस्वियों की उम्र नहीं देखी जाती। मतलब साफ़ है-जब से जागे तभी सवेरा।

२.किसी खास समय के चक्कर में न पड़ें। प्रभु-स्मरण के लिये हर घड़ी शुभ घड़ी है।

३.किसी खास स्थान का भी कोई सीधा संबंध साधना से नहीं है क्योंकि सत्य तो सर्वत्र उपलब्ध है। कहा जाता है-

इदं तीर्थं इदं तीर्थं भ्रमन्ति तामसा जनाः
आत्म तीर्थं न जानन्ति कथं मोक्षो वरानने

अस्तु, आत्म-तीर्थ को न जाना तो बाकी सारे तीर्थ निरर्थक हैं।

3 comments:

Mumukshh Ki Rachanain said...

"आत्म-तीर्थ को न जाना तो बाकी सारे तीर्थ निरर्थक हैं।'

अपना भी ऐसा ही भाव है और मैं इसी पथ पर विगत २० वर्षों से चल रहा हूँ.

मन की बात कहने का आभार.

चन्द्र मोहन गुप्त

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

"आत्म-तीर्थ को न जाना तो बाकी सारे तीर्थ निरर्थक हैं।"

सचमुच बहुत ही सुन्दर बात कही आपने...आपका ये प्रयास सराहनीय है....आभार

Kanishka Kashyap said...

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